अध्याय - 8

आश्‍वासन

परिभाषा

8.1प्रश्न के या चर्चा के उत्तर के दौरान यदि मंत्री सरकार की ओर से आगे कार्रवाई किए जाने के संबंध में सदन को फिर से सूचित करने का वचन देता है तो उसे च्आश्‍वासन कहते हैं। कथन जो सामान्यत: आश्‍वासन माने जाते हैं उनकी एक मानक सूची अनुबंध-3 में दी गई है। इस मानक सूची को लोक सभा और राज्य सभा की सरकारी आश्‍वासनों संबंधी समितियों का अनुमोदन प्राप्त है। क्योंकि आश्‍वासनों को निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्यान्वित करना अपेक्षित होता है इसलिए सभी संबंधित व्यक्तियों को प्रश्नों के उत्तरों का प्रारूपण करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इन कथनों का प्रयोग केवल ऐसे अवसरों पर किया जाए जबकि इन कथनों द्वारा स्पष्टत: कोई आश्‍वासन देने का इरादा हो।

8.2जब कोई आश्‍वासन किसी मंत्री ने दिया होे अथवा पीठासीन अधिकारी सदन को सूचना प्रस्तुत करने के लिए सरकार को निर्देश देता है तो संसदीय कार्य मंत्रालय संबंधित कार्यवाही से आश्‍वासनों को छांट लेता है और जिस तारीख को वह आश्‍वासन दिया गया हो, उससे सामान्यत: 10 दिन के भीतर संबंधित विभाग को भेज देता है।

आश्‍वासनों की सूची से निकाल देना

8.3.1यदि प्रशासनिक विभाग को ऐसे किसी वक्तव्य को आश्‍वासन मानने में आपत्ति हो या वह महसूस करे कि सार्वजनिक हित में आश्‍वासन की पूर्ति नहीं की जा सकती हो, तो वह विभाग इस प्रकार के पत्रादि के प्राप्त होने के एक सप्ताह के भीतर ही इसको आश्‍वासनों की सूची से हटा देने के लिए संसदीय कार्य मंत्रालय को प्रति भेजते हुए सीधे लोक सभा/राज्य सभा सचिवालय को लिखेगा। इसके लिए अपने मंत्री का पूर्व अनुमोदन प्राप्त करना अपेक्षित है।

8.3.2विभागों को संसदीय कार्य मंत्रालय से आश्‍वासनों का विवरण प्राप्त होते ही तत्काल आश्‍वासनों को सूची में से हटा देने के लिए निवेदन केवल अपवाद रूप में ही करना चाहिए और तभी करना चाहिए जब वे पूरी तरह से आश्‍वस्त हों कि आश्‍वासन को किसी भी हालत में कार्यान्वित नहीं किया जा सकता है और उन के पास सूची से हटा देने के निवेदन करने के सिवाय अन्य कोई विकल्प नहीं रह गया है। ऐसे निवेदनों को उनके मंत्री का अनुमोदन प्राप्त होना चाहिए और उक्त निवेदन वाले उनके पत्र में इस तथ्य का उल्लेख होना चाहिए। यदि ऐसा निवेदन 3 मास की निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने के करीब किया जाता है तो, उक्त निवेदन में समय बढ़ाने के लिए निवेदन भी अवश्य ही साथ में होना चाहिए। जब तक सरकारी आश्‍वासनों संबंधी समिति का कोई निर्णय उन्हें प्राप्त न हो जाए, तब तक विभाग को समय-सीमा बढवाने का अनुरोध करते रहना चाहिए। उपरोक्त पत्राचार की प्रतियां संसदीय कार्य मंत्रालय को भी साथ-साथ पृष्ठांकित की जानी चाहिए।

आश्‍वासनों की पूर्ति की समय-सीमा

8.4.1दोनों सदनों में से किसी भी सदन में दिया गया आश्‍वासन, आश्‍वासन दिए जाने की तारीख से तीन महीने की अवधि के अंदर पूरा किया जाना आवश्यक है। इस समय सीमा का पूरी तरह से पालन किया जाए।

आश्‍वासनों को पूरा करने की समय-सीमा बढ़ाना

8.4.2यदि विभाग यह अनुभव करे कि आश्‍वासन तीन महीने की निर्धारित अवधि अथवा पहले बढ़ाई गई अवधि के भीतर पूरा नहीं किया जा सकता है तो जैसे ही समय बढ़ाने की आवश्यकता हो वह देरी का कारण और संभावित अतिरिक्त समय का उल्लेख करते हुए और समय बढ़वाने के लिए संसदीय कार्य मंत्रालय को सूचित करते हुए सरकारी आश्‍वासनों संबंधी समिति से सीधे निवेदन करेगा। इस आशय का पत्र मंत्री के अनुमोदन से जारी किया जाना चाहिए।

आश्‍वासनों का रजिस्टर

8.5.1प्रत्येक आश्‍वासन के ब्यौरे संबंधित विभाग के संसद एकक द्वारा अनुबंध-4 में दिए गए रजिस्टर में दर्ज किए जाएंगे और इसके पश्चात् आश्‍वासन संबंधित अनुभाग को भेज दिया जाएगा

8.5.2इस प्रकार के आश्‍वासनों को पूरा करने की कार्रवाई प्रत्येक अनुभाग द्वारा शीघ्रता से यहां तक कि संसदीय कार्य मंत्रालय से पत्रादि के प्राप्त होने से पूर्व ही की जानी चाहिए और आश्‍वासनों की पूर्ति पर अनुबंध-5 में दिए गए रजिस्टर के माध्यम से निगरानी रखी जानी चाहिए।

8.5.3पैरा 8.5.1 तथा पैरा 8.5.2 में उल्लिखित रजिस्टर लोक सभा और राज्य सभा के आश्‍वासनों के लिए अलग-अलग रखे जाएंगें और उनमें सत्रवार प्रविष्टियां की जाएंगी

अनुभाग अधिकारी और शाखा अधिकारी का कार्य

8.6.1संबंधित अनुभाग का प्रभारी अनुभाग अधिकारी:-

(क) रजिस्टरों की सप्ताह में एक बार छानबीन करेगा;

(ख) यह सुनिश्चित करेगा कि बिना किसी भी प्रकार की देरी के आवश्यक अनुवर्ती कार्रवाई की जाती हैं;

(ग) यदि संबंधित सदन का सत्र चल रहा हो, तो पखवाड़े में एक बार अन्यथा महीने में एक बार इन रजिस्टरों को शाखा अधिकारी को प्रस्तुत करेगा और उसका ध्यान विशेष रूप से ऐसे आश्‍वासनों की ओर आकर्षित करेगा जिनके तीन महीने के भीतर पूरे होने की संभावना नहीं है; और

(घ) लंबित आश्‍वासनों की पुनरीक्षा उच्चतम स्तर पर आवधिक रूप में की जानी चाहिए ताकि आश्‍वासनों के कार्यान्वयन मंें देरी को न्यूनतम किया जा सके।

8.6.2इसी प्रकार शाखा अधिकारी अपने उच्च अधिकारियों और मंत्री को आश्‍वासनों के कार्यान्वयन की दिशा में हुई प्रगति के बारे में अवगत कराएगा और देरी के मामलों की ओर विशेष रूप से उनका ध्यान आकर्षित कराएगा।

आश्‍वासन को पूरा करने की कार्यविधि

8.7.1आश्‍वासन को निर्धारित समय के भीतर पूरा करने की पूरी कोशिश की जानी चाहिए। यदि सूचना का केवल कुछ अंश ही उपलब्ध हो और शेष सूचना को एकत्र करने में काफी समय लग सकता हो, तो उपलब्ध सूचना निर्धारित समय के भीतर आश्‍वासन के आंशिक कार्यान्वयन में संसदीय कार्य मंत्रालय को भेज दी जानी चाहिए। लेकिन आश्‍वासन को पूरा करने के लिए शेष सूचना को जल्दी से जल्दी प्राप्त करने की कोशिश जारी रहनी चाहिए।

8.7.2किसी आश्‍वासन को पूरा करने के संबंध में भेजी जाने वाली आंशिक या पूर्ण सूचना का संबंधित मंत्री द्वारा अनुमोदन होना चाहिए और प्रत्येक की हिन्दी तथा अंग्रेजी मंे 15-15 प्रतियां अनुबंध-6 में उल्लिखित फार्म में अनुलग्नकों सहित कार्यान्वयन प्रतिवेदन भेजने वाले अधिकारी द्वारा एक प्रति हिन्दी और एक प्रति अंग्रेजी में अधिप्रमाणित करते हुए संसदीय कार्य मंत्रालय को भेज दी जानी चाहिए। पर यदि दी जाने वाली सूचना एक से अधिक सदस्य द्वारा पूछे गए प्रश्न आदि के उत्तर में दिए गए आश्‍वासन के बारे में दी जा रही हो, तो प्रत्येक सदस्य को भरे हुए प्रोफार्मों की एक अतिरिक्त प्रति (हिन्दी और अंग्रेजी दोनों में) दी जानी चाहिए। इस संसूचना की एक प्रति संसद एकक को भेजी जानी चाहिए ताकि वह एकक अपने रजिस्टर के खाना 7 को भर सके।

8.7.3कार्यान्वयन रिपोर्ट लोक सभा/राज्य सभा सचिवालय को न भेजकर संसदीय कार्य मंत्रालय को भेजी जाए। लोक सभा/राज्य सभा सचिवालय किसी को भी कार्यान्वयन रिपोर्ट की कोई अग्रिम प्रति पृष्ठांकित न की जाए।

सदन के पटल पर कार्यान्वयन रिपोर्ट रखना

8.8कार्यान्वयन रिपोर्ट की छानबीन करने के पश्चात् संसदीय कार्य मंत्रालय उसे संबंधित सदन के पटल पर रखने की व्यवस्था करेगा। यह मंत्रालय सदन के पटल पर रखे गए विवरण पत्रों की एक प्रति संबंधित सदस्य तथा संबंधित विभाग को भेजेगा। संबंधित विभाग के संसद एकक तथा संबंधित अनुभाग उस विवरण के आधार पर अपने-अपने रजिस्टरों में उपयुक्त प्रविष्टियां करेंगे।

सदन के पटल पर किसी विषय से संबंधित आश्‍वासनों के रखने के प्रति उसी विषय से संबंधित कागज रखने का दायित्व

8.9जिन मामलों में कागज (नियम/आदेश/अधिसूचना आदि) सदन के पटल पर रखा जाना आवश्यक हो और जिसके लिए आश्‍वासन भी दिया गया हो, तो उस दायित्व को पूरा करने के लिए पहले इसे सदन के पटल पर रखा जाएगा, इसका दिए गए आश्‍वासन से कोई संबंध नहीं होगा। ऐसा कर लेने के बाद आश्‍वासन के औपचारिक रूप से पूरा करने के संबंध में एक रिपोर्ट सभा पटल पर कागज के रखे जाने की तारीख बताते हुए संसदीय कार्य मंत्रालय को (अनुबंध-6 में) निर्धारित फार्म में पैरा 8.7.2 में पहले ही बताए अनुसार भेज दी जाएगी।

सरकारी आश्‍वासनों पर समितियां

लोक सभा नियम 323, 324 और राज्य सभा नियम 211(क)

8.10संसद के प्रत्येक सदन में सरकारी आश्‍वासनों पर एक समिति होती है जो कि अध्यक्ष/सभापति द्वारा नामित की जाती है। यह समिति कार्यान्वयन प्रतिवेदनों और सरकारी आश्‍वासनों की पूर्ति में लगे समय की छानबीन करती है और उनके संबंध में हुई देरी के कारणों और उनसे संबंधित अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं की ओर, यदि कोई हो, ध्यान आकर्षित करती है। संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा समय-समय पर जारी किए गए अनुदेशों का पूर्णत: पालन किया जाए।

सरकारी आश्‍वासनों पर समितियों की रिपोर्ट

8.11विभाग संसदीय कार्य मंत्रालय से परामर्श करके जहां कहीं आवश्यक होता है उपचारात्मक कार्रवाई के लिए इन दोनों समितियों की रिपोर्टों की छानबीन करेगा।

लोक सभा भंग होने का आश्‍वासनों पर प्रभाव

8.12लोक सभा भंग होने पर कार्यान्वयन के लिए लंबित सभी आश्‍वासनों, प्रतिक्षाओं या वचनों की सरकारी आश्‍वासनों संबंधी समिति, जो अत्यधिक लोक महत्व के हैं, उनका चयन करने के लिए जांच करती है। तब समिति लोक सभा को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करती है जिसमें सरकार द्वारा कार्यान्वित किए जाने के लिए हटाए जाने वाले या पूरा किए जाने वाले आश्‍वासनों के संबंध में विशेष सिफारिश की गयी होती है।

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