अध्याय - 10

राष्ट्रपति के शासन के अधीन राज्यों के संबंध में विधि निर्माण

परिचय

10.1संविधान के अनुच्छेद 356 में यह उपबंध है कि राष्ट्रपति कुछ परिस्थितियों में, उद्घोषणा द्वारा, किसी राज्य का प्रशासन संभाल सकते हैं जिसमें राज्य के विधान मंडल की शक्तियों का प्रयोग:

(क) संसद द्वारा; अथवा

(ख) संसद के प्राधिकार के अधीन (संविधान के अनुच्छेद 357 के अनुसार) किया जाएगा।

संसद द्वारा विधान बनाने की कार्यविधि

10.2यदि (10.1 (क) के अनुसार) किसी राज्य के विधान मंडल की शक्तियों का प्रयोग संसद द्वारा किया जाता है तो विधायी प्रस्ताव -

(क) केन्द्र में संबंधित विभाग,

अथवा

(ख) संबंधित राज्य सरकार द्वारा प्रवर्तित किए जाएंगे।

इन दोनों ही मामलों में संबंधित विभाग गृह मंत्रालय के और उपर्युक्त (क) के बारे में, संबंधित राज्य सरकार के साथ भी, शीघ्रातिशीघ्र परामर्श करेगा। इसके बाद, विधान अधिनियमित करने के संबंध में कार्यविधि उपयुक्त परिवर्तनों सहित, वही होगी जो कि अध्याय IX में केन्द्रीय विधान के संबंध में दी गई है। इस संबंध में गृह मंत्रालय द्वारा समय-समय पर जारी किए गए अनुदेशों का भी पालन किया जाएगा।

राष्ट्रपति द्वारा विधान बनाने की कार्यविधि

10.3यदि उपर्युक्त पैरा 10.1(ख) के अनुसार विधान बनाने की शक्ति संसद द्वारा राष्ट्रपति को प्रत्यायोजित कर दी गई हो तो इस अध्याय में इसके बाद बनाई गई कार्यविधि का अनुपालन किया जाएगा।

विधायी प्रस्तावों का प्रवर्तन

10.4विधायी प्रस्ताव:

(क) केन्द्र में संबंधित विभाग द्वारा स्वत:; या

(ख) संबंधित राज्य सरकार द्वारा प्रवर्तित किए जा सकते हैं।

केन्द्र सरकार द्वारा प्रवर्तित प्रस्ताव

10.5.1उपरोक्त पैरा 10.4(क) के संबंध में, संबंधित विभाग शीघ्रातिशीध्र निम्नलिखित के साथ परामर्श करेगा:

(क) मामले के किसी भी पहलू से संबंधित अन्य विभागों;

(ख) गृह मंत्रालय; तथा

(ग) संबंधित राज्य सरकार

10.5.2इसके बाद उसी कार्यविधि का अनुपालन किया जाएगा जो कि किसी भी सदन में विधेयक के पुर:स्थापन की अवस्था तक केन्द्रीय विधान के लिए अपनाई जाती है। इसके अतिरिक्त पैरा 10.7 में उल्लेख किए गए अनुसार विधेयक के मसौदे को अंतिम रूप दिए जाने के बाद ही मंत्रिमंडल का अनुमोदन प्राप्त किया जाएगा उससे पहले नहीं।

राज्य सरकारों द्वारा प्रवर्तित प्रस्ताव

10.6.1यदि संबंधित राज्य सरकार विधायी प्रस्तावों का प्रवर्तन करती है तो वह उन्हें केन्द्र के संबंधित विभाग को भेजेगी और उसकी प्रतियां गृह मंत्रालय और विधि तथा न्याय मंत्रालय (विधायी विभाग) को पृष्ठांकित करेगी, इसके साथ:

(क) विधेयक का मसौदा;

(ख) एक विस्तृत टिप्पणी जो कि मंत्रिमंडल के लिए प्रस्तुत की जाने वाली टिप्पणी की तरह होगी;

(ग) विधान बनाने के कारणों का एक विवरण जिस पर संबंधित विभाग के सचिव के हस्ताक्षर होंगे;

(घ) वित्तीय प्रभावों पर एक टिप्पणी; और

(ड़) मूल अधिनियम की प्रतियां और संशोधनकारी विधेयकों के मामले में संगत धाराओं के उद्धरण संलग्न किए जाएंगे।

प्रशासकीय विभाग द्वारा संवीक्षा

10.6.2उसके बाद संबंधित विभाग:

(क) विधेयक की जांच करेगा और राज्य सरकार गृह मंत्रालय और केन्द्र में अन्य संबंधित विभागों से परामर्श करके इसकी अनिवार्यता तथा आवश्यकता का निर्धारण करेगा;

(ख) इसे विधि और न्याय मंत्रालय को भेज देगा; और

(ग) यदि [उपर्युक्त (क) तथा (ख) के अनुसार] विधि और न्याय मंत्रालय अथवा अन्य किसी विभाग की सलाह के परिणामस्वरूप परिवर्तन करना आवश्यक हो जाए तो ऐसा परिवर्तन करने से पूर्व संबंधित राज्य सरकार के साथ पुन: परामर्श करेगा।

मंत्रिमंडल का अनुमोदन प्राप्त करना

10.7ऊपर पैरा 10.5 और 10.6 में निर्धारित तरीके से विधेयक को अंतिम रूप दिए जाने पर, संबंधित विभाग प्रस्तावित विधान पर मंत्रिमंडल का अनुमोदन प्राप्त करेगा।

परामर्शदात्री समिति में विधेयक का परिचालन

10.8यदि राष्ट्रपति को शक्ति का प्रत्यायोजन करने वाले कानून के अनुसार, इस प्रयोजन से गठित किसी समिति के साथ परामर्श करना आवश्यक हो तो संबंधित विभाग गृह मंत्रालय को निम्नलिखित सामग्री भेज देगा।

(क)विधेयक की हिन्दी और अंग्रेजी की 150 प्रतियां और समिति के सदस्यों को सूचनार्थ एक व्याख्यात्मक ळ्ाापन सहित अन्य कागजात; और

(ख)गृह मंत्रालय में प्रयोग के लिए विस्तृत सार की 15 प्रतियां।

परामर्शदात्री समिति द्वारा प्रस्ताव पर विचार कर लिए जाने के बाद, गृह मंत्रालय संबंधित विभाग और विधि तथा न्याय मंत्रालय (विधायी विभाग) को आगे की जाने वाली कार्रवाई के बारे में सूचित करेगा।

संबंधित विभाग द्वारा की जाने वाली अगली कार्रवाइ

10.9यदि समिति द्वारा विचार-विमर्श किए जाने के परिणास्वरूप कहीं प्रस्तावित विधान में विशुद्ध रूप से नेमी अथवा तकनीकी प्रकार के परिवर्तनों को छोड़कर कोई परिवर्तन करना आवश्यक समळाा जाता है, तो संबंधित विभाग इस संबंध में मंत्रिमंडल का अनुमोदन प्राप्त करेगा। विधेयक को अंतिम रूप दिए जाने के बाद, इसे विधि और न्याय मंत्रालय (विधायी विभाग) को भेज दिया जाएगा जिसके साथ विधेयक बनाने के कारण भी दिए होंगे और इन पर संबंधित विभाग के सचिव के हस्ताक्षर होंगे।

विधि और न्याय मंत्रालय द्वारा की गई कार्रवाई

10.10विधि एवं न्याय मंत्रालय (विधायी विभाग) विधेयक पर राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त करने और अधिनियम को भारत के राजपत्र और राज्य के सरकारी राजपत्र में प्रकाशित कराने के लिए कार्रवाई करेगा।

अधिनियमों को प्रत्येक सदन पटल पर रखना

10.11संबंधित विभाग ऐसे सभी अधिनियमों को उनके अधिनियम के पश्चात् यथाशीघ्र संसद के प्रत्येक सदन पटल पर रखने की कार्रवाई करेगा और इसकी सूचना विधि और न्याय मंत्रालय (विधायी विभाग), गृह मंत्रालय और संबंधित राज्य सरकारों को भी भेजेगा। यदि सुसंगत शक्तियों के प्रत्यायोजन अधिनियम के उपबंधों के अनुसार संसद के सदन अधिनियम में किसी आशोधन का निर्देश देते हैं तो संबंधित विभाग राष्ट्रपति द्वारा एक संशोधनकारी अधिनियम अधिनियमित करवा के आशोधनों को प्रभावी करने के लिए सम्पूर्ण कार्रवाई करेगा।

सांविधिक नियम, आदेश आदि। गृह मंत्रालय की ता. 7.3.73 की संख्या 36/30/आर.एस./73/पी.ओ.एल. एल. (के) तथा ता. 31.7.73 की संख्या 48/1/एच.आर./73 पी.ओ. एल.एल. (के)

10.12जो सांविधिक नियम, आदेश आदि सांविधिक तौर पर राज्य सरकार द्वारा राज्य विधान मंडल के समक्ष रखे जाने होते हैं उनको राष्ट्रपति शासन के अधीन राज्यों के मामले में संसद में रखा जाएगा। इस प्रयोजन से केन्द्र में संबंधित प्रशासकीय विभाग:

(क) संबंधित राज्य सरकार से प्राप्त करेगा:

(i)संगत नियमों, आदेशों आदि की 45 प्रतियां जो उसने अपने राजपत्र में अधिसूचित की हों; तथा

(ii)जिन मामलों में केन्द्र में अधीनस्थ विधान के बारे में पैरा 11.5.1 में बताई गई समय-सीमा का पालन नहीं किया जा सकता, उनमें इस प्रकार की देरी को स्पष्ट करने वाले विवरण;तथा

(ख) अध्याय XI में इस संबंध में विहित कार्यविधि का पालन करते हुए संसद के दोनों सदनों के पटलों पर नियमों आदि को रखेगा।

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