अध्याय - 12

संसदीय समितियां

भूमिका

12.1.1कार्य के जिन विशिष्ट विषयों को निपटाने के संबंध में विशेषळ्ातापूर्ण अथवा विस्तृत विचार-विमर्श की आवश्यकता होती है उनमें संसद अपनी सहायता के लिए संसदीय समितियों का गठन करती है। संसदीय समिति निम्नलिखित के अनुसरण में गठित की जाती हैं:-

(क) लोक सभा के प्रक्रिया तथा कार्यसंचालन संबंधी नियम और राज्य सभा के प्रक्रिया तथा कार्यसंचालन संबंधी नियम के उपबंध;

(ख) संसद का कोई अधिनियम;

(ग) सदन द्वारा स्वीकृत कोई प्रस्ताव या संकल्प; अथवा

(घ) अध्यक्ष/सभापति की निहित शक्तियां।

स्थायी संसदीय समितियों की एक सूची और उनसे संबंधित अन्य ब्यौरे अनुबंध 23 में दिए गए हैं। लोक सभा द्वारा गठित समितियों पर लागू होने वाले सामान्य उपबंध, लोक सभा नियम के अध्याय XXVI में दिए गए हैं।

12.1.2अनुबंध 23 में दी गई सूची में निर्दिष्ट संसदीय समितियों में से निम्नलिखित तीन वित्तीय समितियां विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं:

लोक सभा नियम 308, 309

(क) लोक लेखा समिति: यह विनियोग लेखाओं, वार्षिक वित्त लेखाओं और सदन के समक्ष प्रस्तुत किए गए ऐसे अन्य लेखाओं की, जिन्हें समिति उपयुक्त समळो जांच करती है।

लोक सभा नियम 310 से 312 तक

(ख) प्राक्कलन समिति: यह विभिन्न विभागों के प्राक्कलनों की जांच, बचत करने, वैकल्पिक नीतियां सुळााने और यह देखने के लिए करती है कि अंतिम व्यवस्था नीति के अनुरूप है अथवा नहीं है।

लोक सभा नियम 312क, 312ख

(ग) सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति : यह सरकारी क्षेत्र के विशिष्ट उपक्रमों के कार्य-चालन की इस दृष्टि से जांच करती है कि क्या उपक्रम का गठन सुस्थापित व्यापारिक सिद्धांतों और विवेकपूर्ण वाणिज्यिक परिपाटियों के अनुरूप किया गया है।

वित्तीय समितियों द्वारा अपनाई गई कार्यविधि

12.2वित्तीय समितियां सामान्यत: निम्नलिखित कार्यविधि का पालन करती हैं:-

(क) वर्ष का कार्यक्रम नियत करना;

(ख) संबंधित विभाग/सरकारी क्षेत्र के उपक्रमों को एक विस्तृत प्रश्नावली भेजना;

(ग) कागजात/दस्तावेज मांगना; और/या

(घ) साक्ष्य के लिए सरकारी तथा गैर सरकारी कर्मचारियों को बुलाना; और/या

(ङ) कार्यालयों, परियोजनाओं, उपक्रमों आदि का दौरा करना ; और/या

(च) अध्ययन के अंतर्गत आने वाले विषय की विस्तृत संवीक्षा के लिए उप समितियों/अध्ययन दलों का गठन करना; और

(छ) लोक सभा/राज्य सभा को अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करना।

कार्यविधि लागू किए जाने का क्षेत्र

12.3.1इन तीन वित्तीय समितियों के संबंध में अपनाई गई कुछ कार्यविधियां, इस अध्याय में यथावर्णित, इन समितियों के लिए समान हैं। लेकिन उनमें से एक अथवा दो समितियों पर लागू होने वाली कार्यविधियां अलग से भी निर्धारित कर दी गई हैं। परन्तु, अनुबंध 23 में सूचीबद्ध सभी संसदीय समितियों पर पैरा 12.10 और 12.15 लागू होंगे।

लो.स. नियम 331 रा.स.नियम 268, 277

12.3.2वित्तीय समितियों के अतिरिक्त, संसद की विभागीय स्थायी समितियां [अनुबंध 23 (ख)] भी हैं। ये समितियां संसद में प्रस्तुत अनुदान मागों, विधेयकों, संबंधित विभाग की वार्षिक रिपोर्टों तथा दीर्घकालिक नीति दस्तावेजों की जांच करती हैं।

वित्तीय समितियों द्वारा मांगी गई

सूचना के संबंध में कार्रवाई

करने के लिए अधिकारी नामजद करना

12.4प्रत्येक विभाग निम्नलिखित कार्य के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी नामित करेगा:-

प्रक्रिया 12.4

(क) वित्तीय समिति द्वारा मांगी गई सूचना प्रस्तुत करना;

(ख) समिति को वह सहायता देना जो उसने मांगी हो; और

(ग) समिति की सिफारिशों के बारे में विभाग में की जाने वाली कार्रवाई का समन्वय करना।

ऐसे अधिकारी का नाम समिति के सचिवालय को भेजा जाएगा।

वित्तीय समितियों को सामग्री प्रस्तुत करना

12.5.1समिति को भेजी गई निम्नलिखित सामग्री अनिवार्यत: संबंधित विभाग केकम से कम संयुक्त सचिव के स्तर के अधिकारी द्वारा अनुमोदित होनी चाहिए और यदि अपरिहार्य परिस्थितियों में उस पर संयुक्त सचिव के हस्ताक्षर न किए जा सकते हों, तो पत्र में यह उल्लेख कर दिया जाएगा कि उस सामग्री को संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी का अनुमोदन प्राप्त है:

प्रक्रिया 12.12

(क) समिति द्वारा मांगी गई प्रारंभिक सामग्री;

(ख) प्रशानवली के उत्तर;

(ग) समिति के समक्ष विभाग/उपक्रम के प्रतिनिधियों ने जो साक्ष्य दिए हैं उनसे उठने वाले सवालों के उत्तर; और

(घ) समिति की रिपोर्टों में की गई सिफारिशों पर सरकार द्वारा की गई कार्रवाई दर्शाने वाले उत्तर।

12.5.2लोक सभा सचिवालय द्वारा विभाग को भेजे गए पत्र में विहित समय के भीतर ऊपर दी गई सामग्री की 40 अंग्रेजी प्रतियां तथा 15 हिन्दी प्रतियां प्रस्तुत की जानी चाहिए।

लोक लेखा समिति को सामग्री प्रस्तुत करना प्रक्रिया 12.6 से 12.11

12.6.1लेखा-परीक्षा विभाग, वर्ष के विनियोग लेखाओं को अंतिम रूप दे दिए जाते ही और पहला प्रूफ पाने के लिए उनको प्रेस में भेजते ही, संबंधित विभागों को ऐसे मामलों की सूचना देगा जिनमें अधिक खर्च किया गया हो। इसके बाद, विभाग अधिक खर्च के कारण बताने वाली टिप्पणियां, जो लेखा-परीक्षा विभाग द्वारा विधिवत् पुनरीक्षित हों वित्त मंत्रालय को भेजेगा। लेखा परीक्षा विभाग द्वारा विधिवत् पुनरीक्षित व्याख्यात्मक टिप्पणियों (नोट) को, उस मंत्रालय का बजट प्रभाग, लोक लेखा समिति को प्रस्तुत करेगा, लेकिन ऐसी प्रस्तुति संसद को विनियोग लेखाओं को प्रस्तुत करने के तुरन्त बाद या 31 मई तक, जो भी बाद में हो, की जाएगी।

12.6.2उपर्युक्त के अतिरिक्त, अन्य टिप्पणियां, ळ्ाापन आदि भी लोक लेखा समिति को औपचारिक रूप से प्रस्तुत किए जाने से पहले अनिवार्यत: लेखा परीक्षा विभाग को दिखा दिए जाएंगे। यदि समिति द्वारा निर्धारित अवधि के भीतर ऐसा करना संभव न हो तो संबंधित विभाग लेखा परीक्षा विभाग को भेजी गई टिप्पणियों की अग्रिम प्रतियां साथ ही साथ लोक सभा सचिवालय को भी भेजेगा ताकि समिति बिना विलंब किए अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप दे सकें।

वित्तीय समितियों को गोपनीय दस्तावेज प्रस्तुत करना

प्रक्रिया 12.5

12.7गोपनीय दस्तावेजों को भेजने के संबंध में अनुरोध प्राप्त होने पर संबंधित विभाग, मंत्री महोदय के अनुमोदन से:

(क) दस्तावेज भेजेगा; अथवा

(ख) समिति के अध्यक्ष को दस्तावेज इस सिफारिश के साथ भेजेगा कि उन्हें समिति के सदस्यों में परिचालित न किया जाए; या

(ग) ऐसे दस्तावेज देने से इंकार कर देगा, जिनके बारे में यदि यह समळाा जाए कि उनके प्रकट किया जाने से देश की सुरक्षा अथवा हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

वित्तीय समितियों की बैठकों में विभागों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति प्रक्रिया 11.15 से 11.17 अध्यक्षीय निदेश 59

12.8जिस विभाग अथवा उपक्रम को समिति के समक्ष किसी भी मामले पर साक्ष्य देने के लिए कहा जाए उसका प्रतिनिधित्व, यथास्थिति, उसके सचिव अथवा अध्यक्ष द्वारा किया जाएगा, यदि समिति के अध्यक्ष ने इस आशय का अनुरोध प्राप्त होने पर किसी अन्य वरिष्ठ अधिकारी को उस विभाग अथवा उपक्रम का प्रतिनिधित्व करने की अनुमति न दी हो। यदि किसी उपक्रम का सचिव/अध्यक्ष ऐसी समिति के समक्ष उपस्थित होने में असमर्थ हो, तो उसके न आने के कारण और उसके स्थान पर भेजे जाने वाले अधिकारी का नाम पहले से सूचित कर दिया जाएगा।

प्राक्कलन समिति /लोक लेखा समिति की सिफारिशों पर की गई कार्रवाई का समन्वय

12.9.1प्राक्कलन समिति और लोक लेखा समिति की सिफारिशों की जांच करने और उनके उत्तर भेजने की निम्नलिखित कार्यविधि है:-

(क) किसी एक विभाग से संबंधित सिफारिश पर संबंधित विभाग ही कार्रवाई करेगा।

प्रक्रिया 12.18, 12.19

(ख) जिन सिफारिशों का संबंध रिपोर्ट किए गए विभाग के अतिरिक्त अन्य विभागों से भी है उनके बारे मंे:

(i)यदि वे वित्त अथवा बजट संबंधी सामान्य सवाल उठाते हैं, तो वित्त मंत्रालय (व्यय विभाग), सिफारिशों के समन्वय का कार्य संबंधित विभाग के साथ परामर्श करके करेगा। (समिति को भेजा जाने वाला अंतिम उत्तर या तो रिपोर्ट किए गए विभाग या वित्त मंत्रालय, जैसा भी परस्पर तय हो, द्वारा जारी किया जाएगा) ; और

(ii)यदि वे आमतौर पर और अन्य नीतिगत सवाल उठाएं, तो रिपोर्ट किए गए विभाग द्वारा, उन सिफारिशों पर मंत्रिमंडल सचिवालय के साथ परामर्श करके कार्रवाई की जाएगी।

वित्त मंत्रालय का कार्यालय ळ्ाापन संख्या बी.12 (31)-(समन्वय) /67 तारीख 16.5.68

(ग) लोक लेखा समिति की रिपोर्टों के बारे में, यह सुनिश्चित करने का दायित्व कि अंतिम उत्तर लेखा-परीक्षा से विधिवत पुनरीक्षित होकर रिपोर्ट की छ: मास की निर्धारित अवधि के अंदर समिति के पास पहंुच जाए, निम्नलिखित का होगा:

(i)निम्नलिखित को अंकित की गई सिफारिशों के बारे में व्यय विभाग का:

- उस विभाग को;

-उस विभाग और अन्य विभागों में से एक या अधिक विभागों को संयुक्त रूप से; तथा

-समस्त विभागों को

(ii)अन्य मामलों में संबंधित विभाग को सिफारिशों सहित

संसद की समिति द्वारा की गई सिफारिशों का कार्यान्वयन

प्रक्रिया 12.21 से 12.27

12.9.2संबंधित विभाग समिति को एक ऐसा विवरण प्रस्तुत करेगा जिसमें रिपोर्ट में दी गई सिफारिशों पर की गई कार्रवाई और सभी सिफारिशों पर सरकार के विचार तथा जो सिफारिशें सरकार को मंजूर हैं, उनका भी उल्लेख करेगा।

अध्यक्षीय निदेश 102 मंत्रिमंडल सचिवालय, के कार्यालय ळ्ाापन संख्या 71/10/सी. एफ./66 तारीख 12.11. 66 तथा संख्या 71/10/सी. एफ-69 तारीख

6.4.70

12.10.1यदि किसी संसदीय समिति की किसी सिफारिश को स्वीकार न करना हो, तो विभाग:

(क) मंत्री महोदय को मामला प्रस्तुत करेगा जिसमें सिफारिशों को स्वीकार न करने के कारणों को स्पष्ट किया जाएगा, और इस संबंध में उनके आदेश प्राप्त करेगा कि क्या मामला मंत्रिमंडल को प्रस्तुत किया जाए;

(ख) मंत्री के आदेशों के अनुसार कार्रवाई करेगा; और

(ग) समिति के समक्ष सरकार के विचार रखेगा।

12.10.2यदि समिति उचित समळो तो सरकार के दृष्टिकोण पर विचार कर लेने के बाद सदन को एक और रिपोर्ट पेश कर सकती है।

12.10.3यदि किसी संसदीय समिति की रिपोर्ट में ऐसे कुछ तथ्यात्मक ब्यौरे हों जिनसे सरकार के पास असहमत होने के कारण हों तो ऐसे तथ्यात्मक ब्यौरों को समिति के ध्यान में लाया जाएगा।

प्रक्रिया 12.25

12.10.4किसी संसदीय समिति की रिपोर्टों के अंतर्विषयों के बारे में समिति को सूचित किए बिना अथवा अध्यक्ष/सभापति की अनुमति लिए बिना सर्वाजनिक रूप से व्यक्त कथन, विचार अथवा अभिमत को सदन का विशेषाधिकार भंग समळाा जाएगा और ऐसी स्थिति से बचा जाना चाहिए।

वित्तीय समितियों की सिफारिशों पर की गई कार्रवाई प्रक्रिया 12.26

12.11पैरा 12.9.1 में बताई गई शर्तों के अधीन प्रत्येक विभाग संसद में रिपोर्ट पेश किए जाने की तारीख से छ: महीने के भीतर रिपोर्ट में दी गई सिफारिशों पर सरकार द्वारा की कार्रवाई का एक विवरण-पत्र समिति के समक्ष प्रस्तुत करेगा। इसके लिए असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर कोई समय सीमा नहीं बढ़ाई जाएगी। लोक लेखा समिति के मामले में ऐसे विवरण का लेखा परीक्षा विभाग द्वारा पुनरीक्षण किया जाएगा।

वित्तीय समितियों की रिपोर्ट पर की गई कार्रवाई से संबंधित टिप्पणियां प्रक्रिया 12.28

12.12वित्तीय समिति की मूल रिपोर्ट पर संबंधित विभाग ने जो कार्रवाई की है उसके संबंध में वित्तीय समिति द्वारा टिप्पणियों सहित अपनी रिपोर्ट एक बार लोक सभा में प्रस्तुत कर देने के बाद सामान्यत: यह समळा लिया जाएगा कि समिति द्वारा की जाने वाली जांच की प्रक्रिया पूरी हो गई है। लेकिन यदि समिति द्वारा प्रस्तुत की गई च्कार्रवाई विषयक रिपोर्ट में ऐसा कहा गया हो कि मूल रिपोर्ट की कुछ सिफारिशों से संबंधित उत्तर आने अभी भी बाकी हैं तो संबंधित विभाग च्की गई कार्रवाई विषयक रिपोर्ट के लोक सभा में प्रस्तुत किए जाने के बाद भी, बाकी सिफारिशों के संबंध में अपने उत्तर भेज देगा।

प्रशासनिक रिपोर्टों आदि को वित्तीय समितियों के सदस्यों में परिचालित करना प्रक्रिया 12.1 एवं 12.2

12.13इन समितियों में उपयोग किए जाने के लिए विभागों की वार्षिक रिपोर्टों की प्रतियां इस संबंध में लोक सभा सचिवालय के विशेष अनुरोध पर अलग से उपलब्ध कराई जाएंगी।

नई सरकारी कंपनियों / सांविधिक निकायों की स्थापना से संबंधित सूचना लोक उपक्रम समिति को भेजना प्रक्रिया 12.3

12.14किसी भी सरकारी कंपनी अथवा सांविधिक निगम के स्थापित किए जाने के तुरन्त बाद ही प्रशासनिक विभाग लोक सभा सचिवालय को लोक उपक्रम समिति के सूचनार्थ निम्न सूचना भेजेगा:-

(क) उसके गठन संबंधी सूचना;

(ख) उससे संबंधित संगम अनुच्छेद और संगम ळ्ाापन/संविधि के दो सैट; तथा

(ग) कंपनी/निगम की वार्षिक रिपोर्टों और लेखाओं की एक-एक प्रति और यदि उसके बजट-प्राक्कलन लोक सभा में पेश किए गए हों तो उन बजट-प्राक्कलनों की भी एक प्रति।

संसदीय समितियों के समक्ष साक्ष्य देने वालों के मार्गदर्शन के लिए आचरण और शिष्टाचार

12.15.1किसी संसदीय समिति के समक्ष साक्षी के तौर पर उपस्थित होने वाले व्यक्ति से मर्यादित व्यवहार की अपेक्षा की जाती है। संसदीय समिति के समक्ष साक्षी के तौर पर उपस्थित होते समय वह विशेष रूप से निम्न बातों का ध्यान रखेगा:

(क) अपना स्थान ग्रहण करने से पहले समिति/उपसमिति के अध्यक्ष के समक्ष सिर ळाुकाकर समुचित आदर प्रकट करेगा;

(ख) अपने लिए निर्धारित स्थान ग्रहण करेगा;

प्रक्रिया 11.14

(ग) यदि अध्यक्ष कहेंगे तो वह (साक्षी) शपथ लेगा/सत्यनिष्ठ रहने का प्रतिळ्ाान करेगा और ऐसा करते समय खड़ा हो जाएगा और शपथ लेने/सत्यनिष्ठा का प्रतिळ्ाान करने से पहले अध्यक्ष के समक्ष सिर ळाुकाएगा;

(घ) अध्यक्ष अथवा समिति के किसी सदस्य अथवा अध्यक्ष द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा पूछे गए विशिष्ट प्रश्नों का उत्तर देगा;

(ड.) अध्यक्ष तथा समिति को दिए जाने वाले सभी बयान नम्र एवं विनयपूर्ण भाषा में होंगे;

(च) गवाही समाप्त हो जाने पर जब अध्यक्ष उसे जाने के लिए कहेंगे तो वह अध्यक्ष के समक्ष सिर ळाुकाकर सम्मान प्रदर्शित करेगा;

(छ) समिति में उपस्थिति के दौरान धूम्रपान नहीं करेगा अथवा पान/तंबाकू आदि नहीं चबाएगा; तथा

(ज) इस बात का ध्यान रखेगा कि लोक सभा के प्रक्रिया तथा कार्यसंचालन संबंधी नियम 270 के परन्तुकों के अधीन निम्न प्रकार के कार्य, समिति का विशेषाधिकार भंग और समिति की अवमानना समळो जाएंगे:-

(i)प्रश्नों का उत्तर देने से इंकार करना;

(ii)वाक्छल अथवा जानबूळाकर ळाूठी गवाही देना अथवा सच्चाई छिपाना अथवा समिति को गुमराह करना;

(iii)समिति के साथ तकरार करना अथवा अपमानजनक उत्तर देना; तथा

(iv)जांच से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज को नष्ट करना अथवा क्षति पहंुचाना।

12.15.2यदि कोई अधिकारी (उक्त पैरा 12.15.1 के उप-पैरा (ज) के अनुसार) नियम 270 के किसी भी परन्तुक का आश्रय लेना चाहता है तो उसे कोई भी बात समिति के समक्ष तत्काल ही आपत्ति के रूप में नहीं कहनी चाहिए बल्कि इस आश्य का अंतरिम उत्तर देना चाहिए कि उसके लिए प्रश्न का उपयुक्त अथवा सुविचारित उत्तर देने से पूर्व कागजों का अध्ययन करना और कुछ समय लेना आवश्यक है। फिर, वह समिति के अध्यक्ष या सचिव से संपर्क कर उसे अपनी कठिनाइयां बता सकता है। इसके बाद, अध्यक्ष उसे इस संबंध में की जाने वाली आगे की कार्रवाई का निर्देश देगा और यह बताएगा कि इस संबंध में मंत्री महोदय से विचार-विमर्श करना भी आवश्यक है अथवा नहीं।

[ Home ] [ Next ] [ Back ]