अध्याय - 13

परामर्शदात्री समितियां

क्षेत्र और कार्य

13.1.1 संसदीय कार्य मंत्रालय भारत सरकार के विभिन्न विभागों के लिए परामर्शदात्री समितियों का गठन करता है। इन समितियों के सदस्य दोनों सदनों से लिए जाते हैं। और इनकी संख्या का निर्धारण संसद में विपक्षी दलों/ग्रुपों के साथ परामर्श करके और संसद में विभिन्न दलों/ग्रुपांे की सदस्य संख्या की अलग-अलग स्थिति को ध्यान में रखकर किया जाता है। प्रारंभ में समितियों का गठन नई लोक सभा गठित होने के पश्चात् किया जाता है तथा उसके पश्चात् उनका पुनर्गठन, यदि आवश्यक हो, बजट सत्र के समय किया जाता है।

13.1.2 परामर्शदात्री समितियां, विभाग के कार्यचालन और नीतियों के संबंध में सदस्यों और मंत्रियों के बीच अनौपचारिक विचार-विमर्श के लिए एक मंच प्रदान करती हैं। प्रत्येक विभाग की परामर्शदात्री समिति की अध्यक्षता उस विभाग से संबंधित मंत्री महोदय करते हैं। यदि किन्हीं अपरिहार्य कारणों से वह उपस्थित न हो सकें तो उस विभाग के राज्य मंत्री अध्यक्षता करेंगे।

बैठक कब बुलायी जाए

13.2.1 इस समिति की बैठकें सत्रों के दौरान तथा दो सत्रों के बीच की अवधि में भी आयोजित की जाती हैं। प्रत्येक समिति की कम से कम एक बैठक सत्र के दौरान एक बैठक सत्रों के बीच की अवधि में बुलायी जानी चाहिए। संसदीय कार्य मंत्रालय, बैठक के लिए संबंधित विभाग से सुविधाजनक तारीखों का पता लगा लेता है और इसके बाद औपचारिक रूप से सदस्यों और अन्य संबंधित व्यक्तियों को सूचना भेज देता है।

13.2.2 अध्यक्ष के विवेकानुसार समिति की एक बैठक सत्रों के बीच की अवधि के दौरान कलैंडर वर्ष में भारत में कहीं भी दिल्ली से बाहर बुलायी जा सकती है। बैठक के स्थान पर सदस्यों के परिवहन, आवास तथा भोजन की व्यवस्था संबंधित विभाग करेगा।

बैठक की कार्यसूची

13.3 कार्यसूची-मदें, सदस्यों से मांगी जाती हैं या फिर समिति के सदस्यों के परामर्श से स्वयं विभाग द्वारा निर्धारित की जाती हैं। यदि समिति के सदस्यों से इतर अन्य कोई सदस्य किसी विशेष समिति की बैठक में चर्चा के लिए कोई मुद्दे सुळााता है और उन्हें कार्यसूची में शामिल कर लिया जाता है तो उसे बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जाएगा, लेकिन शर्त यह है कि वह बैठक में भाग लेने के लिए कोई यात्रा भत्ता/दैनिक भत्ता लेने का हकदार नहीं होगा।

संक्षिप्त विवरण का परिचालन

13.4विभाग के संबंधित अनुभाग कार्यसूची की मदों के बारे में ब्यौरेवार संक्षिप्त विवरण तैयार करेंगे और उन्हें संसद एकक को भेज देंगे। संसद एकक इन विवरणों को समिति के सदस्यों में परिचालित किए जाने के लिए संसदीय कार्य मंत्रालय को भेज देगा। निम्नलिखित के संबंध में मंत्री का अनुमोदन प्राप्त किया जाएगा:-

(क) यदि सदस्यों द्वारा सुळााए गए किसी मुद्दे को कार्यसूची से निकालने का प्रस्ताव हो; अथवा

(ख) यदि किसी मुद्दे से संबंधित ब्यौरेवार संक्षिप्त विवरण को परिचालित करना आवश्यक नहीं समळाा जाए।

ऊपर (क) के मामले में संबंधित सदस्य को उपयुक्त सूचना भेज दी जाएगी जबकि (ख) के मामले में मंत्री के इस्तेमाल के लिए एक स्वत: पूर्ण टिप्पणी तैयार की जाएगी

समितियों में विचार-विमर्श

13.5 इन समितियों में, संसद के सदस्य ऐसे किसी भी विषय पर चर्चा कर सकते हैं जिस पर संसद में ठीक प्रकार से विचार विमर्श किया जा सकता है। समिति में किए जाने वाले विचार-विमर्श अनौपचारिक और पूर्णत: परामर्शात्मक समळो जाते हैं और उनके संबंध में मंत्री अथवा समिति का कोई सदस्य संसद मंे कोई उल्लेख नहीं कर सकता। अत: अन्य संसदीय कार्य के बारे में मंत्रियों के लिए संक्षिप्त विवरण तैयार करते समय विभाग के सभी संबंधित व्यक्तियों को इस बारे में सावधानी बरतनी चाहिए कि परामर्शदात्री समितियों में हुए विचार विमर्श का कोई उल्लेख न किया जाए।

अधिकारियों द्वारा उपस्थिति और दस्तावेज प्रस्तुत किया जाना

13.6 समिति की बैठकों में विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेते हैं ताकि वे तथ्यों एवं आंकड़े उपलब्ध कराके मंत्री की सहायता कर सकें। लेकिन समिति किसी साक्षी को सम्मन नहीं दे सकती अथवा दस्तावेज पेश करने के लिए नहीं कह सकती।

चर्चा का रिकार्ड और आगामी कार्रवाई

13.7संबंधित विभाग बैठकों में हुए विचार-विमर्श का एक संक्षिप्त रिकार्ड तैयार करेगा और उसे संसदीय कार्य मंत्रालय के माध्यम से समिति के सदस्यों में परिचालित करेगा। यदि समिति में सदस्यों के विचारों में एकमतता हो तो सरकार सामान्यत: इसको स्वीकार कर लेगी, केवल उस स्थिति को छोड़कर जबकि:

(क) वित्तीय प्रभाव;

(ख) राज्य की सुरक्षा; और

(ग) मामला किसी स्वायत्त संस्थान के कार्यक्षेत्र में आने के कारण इनको स्वीकार न किया जा सकता हो।

स्वीकार न किए जाने की स्थिति में, समिति को आगामी बैठक में इसके कारण बताएं जाएंगे।

13.8 बैठकों के कार्यवृत्त को बैठक के बाद शीघ्र, बेहतर होगा, एक सप्ताह के भीतर अंतिम रूप दिया जाना चाहिए तथा संबंधित विभाग द्वारा उन्हें समिति के सदस्यों के बीच परिचालित करने के लिए संसदीय कार्य मंत्रालय को भेज देना चाहिए। इसी प्रकार, पूर्ववर्ती बैठकों में लिए गए निर्णयों के संबंध में की गई कार्रवाई संबंधी रिपोर्टें (अंग्रेजी और हिन्दी रूपान्तर) और अगली बैठक के लिए कार्यसूची टिप्पणियां आदि समिति की अगली बैठक से कम से कम 10 दिन पहले संसदीय कार्य मंत्रालय को भेज दी जानी चाहिए। संसदीय कार्य मंत्रालय को भेजी जाने वाली कार्यसूची टिप्पणियां/कार्यवृत्त/की गई कार्रवाई संबंधी रिपोर्टों की प्रतियों की संख्या, सत्र के दौरान होने वाली बैठकों के लिए समिति के कुल सदस्यों की संख्या + 10 के बराबर होनी चाहिए तथा सत्रों के बीच की अवधि के दौरान होने वाली बैठकों के लिए समिति के सदस्यों की संख्या के दुगने और + 10 के बराबर होनी चाहिए।

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