अध्याय - 14

सरकार द्वारा गठित समितियों, परिषदों, बोर्डों तथा आयोगों के संबंध में संसद सदस्यों का नामांकन

समितियों के प्रकार

14.1 दो प्रकार की समितियां गठित की गई हैं जैसे कि सरकारी समितियां अर्थात् वे समितियां जो सरकार द्वारा नियुक्त की जाती हैं एवं संसदीय समितियां अर्थात् वे समितियां जोकि लोक सभा और राज्य सभा द्वारा नियुक्त की जाती हैं या लोक सभा और राज्य सभा द्वारा चुनी जाती हैं अथवा संसद के दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों द्वारा नामित की जाती हैं। संसदीय समितियों में केवल संसद सदस्य शामिल होते हैं जबकि सरकारी समितियां विशेषळ्ाों, पदाधिकारियों, गैर पदाधिकारियों और कभी-कभी संसद सदस्यों को भी शामिल करके बनायी जाती हैं।

सरकारी समितियों पर नामांकन

14.2 च्संसदीय समिति और सरकार द्वारा गठित अन्य निकायों के सदस्यांे का नामांकन का विषय भारत सरकार (कार्य का आबंटन) नियम, 1961 के अंतर्गत संसदीय कार्य मंत्रालय को आबंटित किया गया है। इसी आधार पर संसदीय कार्य मंत्री विभिन्न विभागों द्वारा गठित सभी सरकारी समितियों, परिषदों, बोर्डों, आयोगों आदि में नियुक्त किए जाने वाले संसद सदस्यों का चयन/नामांकन करते हैं। उक्त मंत्रालय को इस तरह के कार्य का आबंटन करने के निम्न कारण हैं कि (क) कोई ऐसा एकल प्राधिकारी होना चाहिए जिसके माध्यम से सरकार द्वारा गठित किए जाने वाले विभिन्न निकायों में संसद सदस्यों का नामांकन किया जाए, (ख) सरकार के मुख्य सचेतक होने के नाते संसदीय कार्य मंत्री इस कार्य के लिए सर्वाधिक उपयुक्त हैं क्योंकि नियत किए गए विभिन्न कार्यों के लिए उन्हें संसद सदस्यों की रूचि, रूळाान, अनुभव, उपयुक्तता और उपलब्धता की जानकारी होती है, और (ग) संसद के दोनों सदनों के सदस्यों के बीच विभिन्न सरकारी निकायों की सदस्यता की समान भागीदारी के लिए कतिपय समान, स्पष्ट और उद्देश्यपरक मानदंडों का पालन किया जाए ताकि ऐसी स्थिति से बचा जा सके जिसमें कि कुछ सदस्यों के पास अत्यधिक कार्य हो, जबकि अन्य के पास कोई कार्य न हो।

नामांकन के दिशा निर्देशों का अनुपालन

14.3विभाग, निर्धारित प्रोफार्मा (अनुबंध 24) में समितियों आदि से संबंधित अपेक्षित जानकारी संसदीय कार्य मंत्रालय को प्रस्तुत करते हुए स्वयं द्वारा गठित की जाने वाली समितियों, परिषदों, बोर्डों आदि में संसदीय कार्य मंत्री द्वारा संसद सदस्यों के नामांकन के लिए प्रस्ताव अग्रेषित करेगा। ऐसे प्रस्तावों को अग्रेषित करते समय विभाग निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखेगा:-

(i) संसदीय कार्य मंत्रालय के अतिरिक्त, कोई भी विभाग किसी भी विभाग में भारत सरकार द्वारा गठित किसी भी समिति, परिषद, बोर्ड, आयोग (इसमें इसके बाद सरकारी निकाय कहा गया है) आदि में संसद सदस्यों का नामांकन नहीं करेंगे। (इनमें वे निकाय शामिल नहीं है जिनमें संसद सदस्यों को अध्यक्ष, लोक सभा अथवा सभापति, राज्य सभा द्वारा नामित किया जाता है या किन्हीं संवैधानिक उपबंधों के आधार पर संसद के किसी भी सदन द्वारा चुना जाता है।)

(ii) यदि प्रस्ताव प्रायोजित करने वाला कोई विभाग किसी कार्य के लिए संसद के किसी विशेष सदस्य (सदस्यों) को नियत कार्य के लिए उपयुक्त समळाता है तो यह सूचना उसके पूर्ण समर्थन के कारणों सहित गोपनीय रूप से मंत्री अथवा सचिव स्तर पर संसदीय कार्य मंत्रालय को दी जानी चाहिए। यह सुनिश्चित करने के लिए इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि संबंधित सदस्यों को इस प्रस्ताव के बारे में सूचित नहीं किया जाना चाहिए जब तक कि उनके नामों का संसदीय कार्य मंत्री द्वारा अनुमोदन नहीं कर दिया जाता है।

(iii) निर्धारित प्रोफार्मा में न भेजे गए प्रस्तावों को दिशा निर्देशों के अनुपालन के लिए संबंधित विभागों को लौटा दिया जाएगा।

(iv) सरकारी निकायों और संबंधित विभागों में संसदीय कार्य मंत्री द्वारा नामित सदस्यों को उनके नामांकन के बारे में सूचना संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा दी जाती है। तथापि, ऐसे निकायों में कार्य करने के लिए सदस्यों की सहमति पहले से प्राप्त नहीं की जाती है। फिर भी यदि किसी अपरिहार्य कारणों से कोई सदस्य किसी निकाय में कार्य करने से मना कर देता है तो संबंधित विभाग को सूचना दी जाती है और इसके साथ-साथ उसके स्थान पर उस निकाय में किसी अन्य सदस्य को नामित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई आरंभ कर दी जाती है।

(iv) सदस्यगण संसद (निरर्हता निवारण) अधिनियम, 1959 के अंतर्गत केवल च्प्रतिपूरक भत्ता आहरित करने के हकदार हैं और ऐसे निकायों की बैठक में भाग लेने के लिए वे किसी अन्य पारिश्रमिक के हकदार नहीं हैं। उपर्युक्त अधिनियम के अनुसार च्प्रतिपूरक भत्ते से तात्पर्य है:-

च्पदाधिकारियों को उनके कार्यालय के कार्यों को निष्पादित करने के लिए उपगत किसी भी व्यय की प्रतिपूर्ति के प्रयोजन से देय दैनिक भत्ता, किसी प्रकार का वाहन भत्ता, मकान किराया भत्ता अथवा यात्रा भत्ते के रूप में दी जाने वाली किसी भी प्रकार की राशि, संसद सदस्य वेतन, भत्ता एवं पेंशन अधिनियम, 1954 (1954 का 30) के अंतर्गत संसद सदस्य को दी जाने वाली दैनिक भत्ते की राशि से अधिक नहीं होगी।

प्रक्रिया 11.6

जो सदस्य भारत सरकार द्वारा गठित समितियों में नियुक्त किए गए हों उन्हें इन समितियों की बैठकों में भाग लेने के लिए यात्रा भत्ता/दैनिक भत्ता उसी दर पर मंजूर किया जाता है जो दरें संसद सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन अधिनियम, 1954 (समय-समय पर यथासंशोधित) की धारा 3 और 4 तथा वित्त मंत्रालय के समय-समय पर यथा संशोधित तारीख 5.9.1960 के कार्यालय ळ्ाापन संख्या एफ.6(26) ई.4/59 में दी गई है। यात्रा भत्ते/दैनिक भत्ते का भुगतान अनुपूरक नियम 90 क (ख) (ii) द्वारा नियंत्रित होता है। सदस्यों को किए गए ऐसे भुगतान की सूचना लोक सभा/राज्य सभा सचिवालय और वेतन एवं लेखा अधिकारी, लोक सभा/राज्य सभा को बैठक समाप्त होने पर, भुगतान किए जाने के तुरन्त बाद दी जानी चाहिए।

(vi) संसद सदस्यों के नामांकन के संबंध में सूचना प्राप्त होने पर विभाग को उनके नामांकन को अधिसूचित करने की कार्रवाई करनी चाहिए और उन्हें संसदीय कार्य मंत्रालय को सूचना देते हुए निकाय के गठन, कार्य, कार्यक्रम आदि सहित सभी प्रकार का आवश्यक मुद्रित विवरण भी दिया जाना चाहिए। ऐसे निकाय के गठन के संबंध में अधिसूचना की एक प्रति सदैव संसदीय कार्य मंत्रालय को पृष्ठांकित की जाएगी।

(vii) किसी सरकारी निकाय में संसद सदस्यों के नामांकन के प्रस्ताव संसदीय कार्य मंत्रालय को केवल तभी भेजे जाने चाहिए यदि निकाय को गठित करने जा रहा विभाग इस मंत्रालय से सूचना प्राप्त होने के शीघ्र बाद संसद सदस्यों के नामांकन के संबंध में अधिसूचना जारी करने की स्थिति में हो। जहां किसी सरकारी निकाय में किसी अन्य हितधारकों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाना है तो उनके नाम को अंतिम रूप दिया जा सकता है और केवल तभी संसद सदस्यों के नामांकन प्रस्तावों को संसदीय कार्य मंत्रालय को भेजा जाना चाहिए।

(viii) यदि किसी भी कारण से उपर्युक्त किसी भी स्थिति के दौरान सरकारी निकाय को गठित न करने का प्रस्ताव रखा जाता है तो इस तथ्य की सूचना ऐसे निर्णय के कारणों सहित संसदीय कार्य मंत्रालय को दी जानी चाहिए।

(ix) जहां किसी सरकारी निकाय, जिसमें संसद सदस्य सहयोजित किए जाते हैं, को परिसमाप्त करने या बंद करने का प्रस्ताव हो तो यह बात ऐसे निर्णय के कारणों सहित संसदीय कार्य मंत्रालय के ध्यान में लायी जानी चाहिए।

(x) यदि किसी ऐसे सरकारी निकाय के कार्यकाल को घटाने या बढ़ाने का निर्णय लिया जाता है तो इस निर्णय की सूचना संसदीय कार्य मंत्रालय को दी जानी चाहिए ताकि उसमें नामित संसद सदस्यों के कार्यकाल को भी घटाया या बढ़ाया जा सके।

(xi) जहां किसी संसद सदस्य को किसी सरकारी निकाय में उसकी व्यक्तिगत योग्यता अथवा किसी विशेष वर्ग, व्यापार, व्यवसाय, संस्था आदि के प्रतिनिधि के रूप में नामित किए जाने का प्रस्ताव हो वहां भी संसदीय कार्य मंत्रालय की सहमति प्राप्त की जानी चाहिए।

(xii) यदि पहले से ही किसी सरकारी निकाय में सेवारत कोई व्यक्ति संसद सदस्य बन जाता है और निकाय के लिए उसकी सदस्यता को जारी रखने का प्रस्ताव रखा जाता है तो संबंधित विभाग उसका हवाला निर्धारित प्रोफार्मा में संसदीय कार्य मंत्रालय को संसदीय कार्य मंत्री के अनुमोदन के लिए भेजेगा।

(xiii) उन मामलों में, जहां किसी सरकारी निकाय में नामित संसद सदस्य की सदस्यता उसके त्यागपत्र देने, निकाय में उसका कार्यकाल समाप्त होने अथवा मृत्यु के कारण समाप्त हो जाती है तो ऐसी रिक्ति को भरने के लिए संसदीय कार्य मंत्रालय को निर्धारित प्रोफार्मा में नए प्रस्ताव भेजे जाने चाहिए।

(xiv) लोक सभा के भंग होने पर, सदन के सभी सदस्य उन सरकारी निकायों के सदस्य नहीं रहेंगे जिनपर वे नामित किए गए थे। ऐसे मामलों में उनके स्थान पर नई लोक सभा के सदस्यों को नामांकित करने का प्रस्ताव संसदीय कार्य मंत्रालय को भेजा जाना चाहिए। तथापि, किसी सरकारी निकाय में नामित राज्य सभा के सदस्य अपना कार्यकाल समाप्त होने तक अथवा राज्य सभा से अपनी सेवानिवृत्ति की तारीख तक, जो भी पहले हो, उसमें बने रहेंगे। फिर भी यदि विभाग नई कार्यविधि के लिए निकाय को पुनर्गठित करने का निर्णय लेता है और इस निर्णय की संसूचना संसदीय कार्य मंत्रालय को देता है तो निकाय में लोक सभा और राज्य सभा के सदस्यों के नामांकन नए सिरे से किए जाएंगे।

(xv) राज्य सभा के सदस्यों के संबंध में, जैसा कि ऊपर बताया गया है, सदन से उनकी सेवानिवृत्ति पर सरकारी निकायों में उनकी सदस्यता समाप्त मानी जाएगी। ऐसे मामलों में भी नए प्रस्ताव निर्धारित प्रोफार्मा में रिक्तियों को भरने के लिए संसदीय कार्य मंत्रालय को भेजे जाते हैं।

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